Blissful Life by Krishna Gopal

Letter 13: ड्रामे का गुह्य रहस्य

DigitalG1 Letter
शेक्सपीयर के अनुसार

“World is a stage & we are all actors.”

The live show is going on there is no retake, no editing in this shooting जो एक बार फिल्माया गया उसमें कोई बदलाव की गुंजाईश नहीं क्योंकि यह एक live show है।
हम सब भाई बहन निम्न बातों से तो भली भांति परिचित हैं अर्थात ज्ञान है
जैसे –
  1. परमात्मा बिन्दु और आत्मा बिन्दु, बिन्दु बन बिन्दु को याद करना, बीती बात में बिन्दु (full stop) लगाना, आत्मा-परमात्मा का सम्बन्ध और कर्तव्य आदि।
  2. बाबा अर्थात परमपिता परमात्मा Creator है, उसके साथ साथ Supreme Director व Principal Actor भी है।
महत्वपूर्ण बात समझने की यह है कि इस Drama का Script writer कौन है? कम से कम बाबा तो नहीं है (वह Director और Actor ही है।) आइये इसको समझने की कोशिश करते हैं।
बाबा को भाग्य विधाता कहते हैं, इस अर्थ में कि वो हमारा भाग्य स्वयं नहीं लिखते। अपनी उदारता और बड़े दिल वाला होने के कारण (इसलिये उन्हें भोलानाथ भी कहा जाता है।) भाग्य लिखने की कलम अपने बच्चों को दे देते हैं और कहते हैं कि बच्चों तुम स्वयं जो चाहो जैसा चाहो भाग्य लिख लो, (पाठ लिख लो।) मैं तो तुम्हें भाग्य लिखने का तरीका बताता हूँ और उसको लिखने की शक्ति प्रदान करता हूँ अर्थात भाग्य लिखने का विधान सिखाता हूँ, इस रूप में मैं भाग्य विधाता कहलाता हूँ।
Scriptwriter तो तुम स्वयं हो और पूर्णतः स्वतंत्र हो। तुम्हारी लिखी script को मैं नहीं बदल सकता। मैं तो Director हूँ तुम्हारी लिखी script के अनुसार तुम्हारा दिग्दर्शन करता हूँ, तुम्हें सिखाता हूँ कि उस Act के लिखे अनुसार तुम्हें कैसे Act करना है ताकि तुम एक सफल अभिनेता बन सको। और स्वयं मैं भी script के अनुसार ही अपना Act perform करता हूँ। मैं भी इस Drama के बंधन में बँध जाता हूँ तभी तो यह Most Accurate Drama बन पाता है।
याद रखिये मनुष्य अपना इतिहास स्वयं लिखता है और कोई नहीं। यह युद्ध हमारा है और कर्म हमारे होते हैं फैसले भी हमारे ही होंगे। यहाँ Director का अर्थ है श्रीमत देना, रोज सवेरे अमृतवेले से लेकर सोने से पहले तक तुम्हें क्या करना है, क्या नहीं करना है आदि।
अच्छा Actor वही होता है जो Director के Direction के अनुसार पूरी लगन व मेहनत से उसे निभाता है अर्थात Play करता है।
बाबा बुद्धि वालों के लिये बुद्धि है। ये मुरली हमें रोज बुद्धि ही तो देती है। एक और महत्वपूर्ण बात है कि script कलियुग से सतयुग की ओर की लिखी जाती है, न कि सतयुग से कलियुग की ओर। जरा स्वयं से पूछो हमने अपनी script कहाँ तक लिखी है द्वापर तक या त्रेता तक या संगम युग पर ही ठहरे हैं जबकि मंजिल सतयुग है। समय बहुत कम है।
एक बार की हुई गलती दुबारा न हो यही पुरुषार्थ करना है। इसी में मेहनत है। प्रतिदिन बाबा के महावाक्यों से जो ज्ञान मिलता है वही हमारे भविष्य का निर्माण करता है, पीछे मुड़कर इधर उधर देखने के लिए नहीं। ज्ञान हमारी दृष्टि को आगे बढ़ाता है। यदि आपकी दृष्टि आगे है तो आप क्या बन सकते हैं इसके कुछ प्रमुख उदाहरण हैं :
मोहनदास करमचंद गाँधी ने जब आगे देखा तो वो महात्मा गाँधी बन गये।
नरेन्द्र ने जब आगे देखा तो वें विवेकानंद बन गये।
दादा लेखराज ने जब आगे देखा तो वो ब्रह्म बाबा व राधे जगदम्बा बन गई।

नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री तो बन ही गये साथ ही आज सारे विश्व के अग्रणीय नेता भी हैं।

जीवन मेहनत से बनता है, मेहरबानियों से नहीं।

सरहदें उन्ही के लिए बनाई जाती हैं जो उड़ नहीं सकते
और हमें तो बेहद की उड़ान भरनी है।

With lots of Love & Affection

Dada
Krishna Gopal

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